डेडपूल और वूल्वरिन मूवी रिव्यू: रायन रेनॉल्ड्स और ह्यू जैकमैन की ब्रोमेंस हर स्तर पर काम करती है

डेडपूल और वूल्वरिन मूवी रिव्यू: रायन रेनॉल्ड्स और ह्यू जैकमैन की ब्रोमेंस हर स्तर पर काम करती है

Saniya Shah 26 जुल॰ 2024

डेडपूल और वूल्वरिन: हल्की-फुल्की कॉमेडी से भरपूर सुपरहीरो एडवेंचर

मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) की नई पेशकश 'डेडपूल और वूल्वरिन' हमें हास्य और एक्शन का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करती है। इसमें डेडपूल के रूप में रायन रेनॉल्ड्स और वूल्वरिन के रूप में ह्यू जैकमैन की शानदार केमिस्ट्री वायरल हो रही है। यह फिल्म सुपरहीरो फैंस के लिए एक अद्भुत रोमांचक सफर प्रस्तुत करती है। कहानी की शुरुआत होती है डेडपूल से, जो एवेंजर्स में शामिल होने का प्रयास करता है लेकिन हैप्पी होगन (जॉन फेवर्यू) इसे अस्वीकार कर देते हैं।

अस्वीकृति के बाद, डेडपूल का जीवन अचानक आम हो जाता है और वह एक पुराने कार के सेल्समैन के रूप में जीवन यापन करने लगता है। लेकिन उसकी विचित्र यात्रा उसे टाइम वेरिएंस अथॉरिटी के पास ले जाती है, जहां उसकी मुलाकात मिस्टर पैरोडॉक्स (मैथ्यू मैकफैडेन) से होती है। मिस्टर पैरोडॉक्स डेडपूल को अपना समयरेखा और बंदों को बचाने का एक और मौका प्रदान करते हैं, जिसमें उन्हें मल्टीवर्स से एक नए वूल्वरिन को ढूंढ़ना होता है।

मल्टीवर्स का रोमांच

डेडपूल, मल्टीवर्स की यात्रा पर निकलता है, जहां उसे विभिन्न वूल्वरिन संस्करणों से मिलना होता है। इसके दौरान ह्यू जैकमैन का वूल्वरिन, जो अपने टीम की हानि का बोझ ढो रहा है, डेडपूल के साथ सहयात्रा करता है। दोनों के बीच निरंतर झगड़े और मजाकी नोकझोंक से भरी यह यात्रा दर्शकों को बांधे रखने में सफल होती है। वे मिलकर द वॉयड की तरफ जाते हैं, जहां उन्हें कैसंड्रा नोवा (एमा कॉरिन), चार्ल्स जेवियर की बहन, का सामना करना पड़ता है।

कैसंड्रा नोवा और रेजिस्टेंस

कैसंड्रा नोवा और रेजिस्टेंस

कैसंड्रा नोवा एक टेलिपाथ है जो लोगों के दिमाग में घुस जाती है। उनकी मुश्किलें तब बढ़ जाती हैं जब वे अपनी याददाश्त और दिमाग सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करने लगते हैं, और अंततः रेजिस्टेंस को भर्ती करने के लिए बॉर्डरलैंड्स की ओर बढ़ जाते हैं। इस दौरान, वे इलेक्ट्रा (जेनिफर गार्नर), ब्लेड (वेस्ली स्निप्स), गैम्बिट (चैनिंग टैटम), और लौरा (डाफ्ने कीन) जैसे पात्रों से मिलते हैं।

हंसी और एक्शन का मेल

फिल्म में अंतहीन हंसी और धमाकेदार एक्शन के दृश्य हैं, जिनमें कई कैमियो शामिल हैं, जैसे कि क्रिस इवांस, वुन्मि मोसाकु, और क्रिस हेम्सवर्थ। रायन रेनॉल्ड्स और ह्यू जैकमैन के बीच की केमिस्ट्री ने फिल्म को एक अलग स्तर तक पहुंचा दिया है। वे दोनों अपने-अपने पात्रों में पूरी तरह से रच बस गए हैं, जिससे दर्शकों को हर दृश्य में गुदगुदी होती है।

कहानी की विशेषताएँ

कहानी की विशेषताएँ

डेडपूल और वूल्वरिन की इस फिल्म में मुख्यतः हास्य और एक्शन का मेल है। दर्शकों को हंसाने और बांधे रखने के सारे तत्व इसमें डाले गए हैं। कहानी में हल्के-फुल्के संवाद और जबरदस्त एक्शन को मिश्रित किया गया है, जिससे दर्शकों को वाहवाही मिलने की संभावना है। मिस्टर पैरोडॉक्स के समयरेखा बचाने के मिशन और वूल्वरिन के साथ दल के सदस्यों की खोज के दौरान की घटनाएं आनंददायक हैं।

डेडपूल और वूल्वरिन की इस जुगलबंदी ने एक नई ऊंचाई दी है। फिल्म में उनकी ब्रोमेंस का असर हर दृश्य में दिखाई देता है। रायन और ह्यू की यह जोड़ी इस फिल्म के मुख्य आकर्षण बनकर उभरी है।

19 टिप्पणि

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    Sonia Singh

    जुलाई 26, 2024 AT 20:40

    क्या बात है, ये फ़िल्म मज़ेदार लग रही है!

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    Ashutosh Bilange

    जुलाई 29, 2024 AT 04:13

    डेडपूल और वूल्वरिन की ब्रोमेंस देख के मेरा दिमाग दहला गया! रायन और ह्यू की चटपटी लाइन्स तो बस पंच मारती हैं। टाइम ट्रैवल का बोला हा-हा थोड़ा गड़बड़ लगा पर एंटरटेनमेंट में कोई दिक्कत नहीं। मैं तो कहूँगा, इस फिल्म में हर सीन में मज़ा है, बस कभी‑कभी साइड स्टोरी थोड़ा खींचती लगती है। कुल मिलाकर एंट्री मस्त है।

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    Kaushal Skngh

    जुलाई 31, 2024 AT 11:46

    मैं इस मूवी को इधर‑उधर की हाइप के हिसाब से नहीं, पर खुद देख कर कहूँगा कि डेडपूल का चुटीला अंदाज़ और वूल्वरन की इमोशनल गहराई ने सही संतुलन बनाया है। फिल्म का pacing ठीक-ठाक है, कुछ जगहें धीमी लगें पर एक्शन सीन से सब ठीक हो जाता है। कुल मिलाकर ठीक‑ठाक, बहुत ज्यादा नहीं बहुत कम भी नहीं।

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    Harshit Gupta

    अगस्त 2, 2024 AT 19:20

    हिंदुस्तान में बनायीं फिल्में अक्सर विदेशी कॉपी लगती हैं, पर ये डेडपूल‑वूल्वरिन कुछ हद तक अपने हूनर में असली भारत की टोन दिखाती है। अगर आप मानते हैं कि मार्वल के सारे कनेक्टेड मॉडल बोरिंग हैं, तो इस फ़िल्म को देखके शायद आपका नज़रिया बदल जाए। लेकिन कुछ लोग कहेंगे कि यह सिर्फ पॉप कल्चर का भाग है, मैं कहूँगा कि इसमें भारतीय डायलग़ की झलक भी है।

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    HarDeep Randhawa

    अगस्त 5, 2024 AT 02:53

    हे!! मुझे लगता है आप बिल्कुल सही कह रहे हैं... लेकिन साथ ही साथ यह भी मानना पड़ेगा कि फिल्म का लफ्ज़‑आधारित ह्यूमर ग्लोबल है!!

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    Nivedita Shukla

    अगस्त 7, 2024 AT 10:26

    डेडपूल और वूल्वरिन की इस मिलन यात्रा ने मेरे अंदर के सुपरहीरो को जाग्रत किया। रायन रेनॉल्ड्स की तेज़-तर्रार डायलॉग डिलीवरी ने मानो समय की दीवारों को भी तोड़ दिया। ह्यू जैकमैन का वूल्वरिन वहन करने वाला दर्द, एक क्षण में सस्पेंस और संवेदना दोनों को जोड़ता है। मल्टीवर्स का कंसेप्ट आजकल सबकी जीभ पर है, पर इस फिल्म में इसे हल्के‑फुल्के अंदाज़ में पेश करना एक कला है। समय यात्रा की कथा में अक्सर जटिलता छिपी होती है, पर यहाँ हर मोड़ पर एक हँसी की बौछार मिलती है। मैं अक्सर सोचता हूँ कि क्या सुपरहीरो का अस्तित्व केवल एंटरटेनमेंट है या सामाजिक प्रतिबिंब भी? इस फ़िल्म में दर्शक को दिखाया गया है कि असफलता और निराशा के बाद भी फिर से उठ खड़ा होना संभव है। डेडपूल का ब्रोथॉड एक मज़ाक ही नहीं, बल्कि जीवन के कठिनाईयों पर हँसने का एक तरीका है। वूल्वरिन का इंटेंस इमोशन एक वास्तविकता का प्रतिबिंब है, जो दर्शकों को गहराई से छूता है। प्रत्येक एक्शन सीन में कैमियो का प्रयोग दर्शकों को आश्चर्यचकित करता है, पर यह सीन को अति-शोभित नहीं करता। कहानी में बिखरे संवादों में बौद्धिक चुटकुले भी हैं, जो न केवल हँसी लाते हैं बल्कि सोचने पर मजबूर भी करते हैं। एक ओर जहाँ डेडपूल का चैट-फ़्रेंडली टोन है, वहीं वूल्वरिन का सिंगल‑माइंडेड एटिट्यूड एक विरोधाभास प्रस्तुत करता है। यह विरोधाभास ही फिल्म को आकर्षक बनाता है, क्योंकि यह दो अलग‑अलग व्यक्तित्वों के तालमेल को दिखाता है। अंत में, जब दोनों पात्र एक साथ लड़ते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे दो अलग‑अलग दुनियां एक ही धड़कन पर मिल गईं। इस प्रकार फिल्म सिर्फ एक सुपरहीरो फ़िल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी भी बन जाती है, जो दर्शकों को हँसाते‑हँसाते सोचने पर मजबूर करती है।

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    Rahul Chavhan

    अगस्त 9, 2024 AT 18:00

    फिल्म में एक्शन और कॉमेडी का बेसिक बैलेंस अच्छा है। डेडपूल की चुटीली बातों से हँसी आती है, और वूल्वरिन की सच्ची भावना दिल को छू लेती है। कुल मिलाकर एक बेस्ट टाइमपास है।

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    Joseph Prakash

    अगस्त 12, 2024 AT 01:33

    मैं सहमत हूँ 🎉 फिल्म मज़ेदार है और बहुत रीलैक्सिंग लगती है

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    Arun 3D Creators

    अगस्त 14, 2024 AT 09:06

    वॉल्वरिन की इमोशन डेडपूल की बर्बादी को सुलझाती है। यह विरोधाभास दर्शकों को नई सोच देता है।

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    RAVINDRA HARBALA

    अगस्त 16, 2024 AT 16:40

    वास्तव में फिल्म का स्क्रिप्ट बहुत साधारण है, कोई गहरा अर्थ नहीं दिखता।

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    Vipul Kumar

    अगस्त 19, 2024 AT 00:13

    अगर हम इस फिल्म को सिर्फ एंटरटेनमेंट मानेंगे तो सही रहेगा, लेकिन इसमें टीम वर्क की सीख भी छुपी है। डेडपूल का अटपटापन और वूल्वरिन का दृढ़ इरादा दोनों मिलकर एक सकारात्मक संदेश देते हैं। नई पीढ़ी को भी इस बात को समझना चाहिए कि अलग‑अलग कौशल मिलकर बड़े काम कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह फ़िल्म एक मज़ेदार सीख भी है।

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    Priyanka Ambardar

    अगस्त 21, 2024 AT 07:46

    बिलकुल सही कहा आपने 😊 फिल्म में दोस्ती की ताकत दिखती है।

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    sujaya selalu jaya

    अगस्त 23, 2024 AT 15:20

    फ़िल्म का संगीत अच्छा है और दृश्यों को जोड़ता है।

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    Ranveer Tyagi

    अगस्त 25, 2024 AT 22:53

    सच में, संगीत बस पृष्ठभूमि के लिए था, लेकिन कुछ सीन में यह बहुत ज्यादा तेज़ था, और इससे कहानी में गहराई नहीं आ पाई, यह एक बड़ी कमी है!!

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    Tejas Srivastava

    अगस्त 28, 2024 AT 06:26

    डेडपूल की तंग-टंग और वूल्वरिन का इमोशनल बर्स्ट, दोनों की टकराव से फिल्म में तनाव बना रहता है, लेकिन फिर भी मज़ा बरकरार रहता है।

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    JAYESH DHUMAK

    अगस्त 30, 2024 AT 14:00

    इस फिल्म में प्रस्तुत किए गए विषयों को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि निर्माता ने न केवल पॉपकल्चर को लक्षित किया है, बल्कि सामाजिक और दार्शनिक प्रश्नों को भी उजागर करने का प्रयत्न किया है। डेडपूल का अतिरंजित हास्य और वूल्वरिन का भावनात्मक संघर्ष एक प्रतीकात्मक द्वंद्व प्रस्तुत करता है, जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ विचार विमर्श की दिशा में भी प्रेरित करता है। मल्टीवर्स की अवधारणा को सरलता से प्रस्तुत किया गया है, जिससे सभी आयु वर्ग के लोग इसे समझ सकें। एक्शन दृश्यों की choreography भी अत्यंत सटीक और प्रभावशाली है, जिससे सिनेमाई अनुभव में वृद्धि होती है। संक्षेप में कहा जाए तो यह फ़िल्म केवल हल्की‑फुल्की कॉमेडी नहीं, बल्कि कई स्तरों पर चिकित्सीय संदेश भी प्रदान करती है।

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    Santosh Sharma

    सितंबर 1, 2024 AT 21:33

    आपकी विश्लेषणात्मक दृष्टि सराहनीय है, यह फिल्म वास्तव में कई आयामों को छूती है।

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    yatharth chandrakar

    सितंबर 4, 2024 AT 05:06

    फिल्म में कुछ हिस्से लंबे लगते हैं, लेकिन अंत में संतुष्टि मिलती है।

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    Vrushali Prabhu

    सितंबर 6, 2024 AT 12:40

    सही कहा, थिओरी में थोडी गड़बड़ थी पर मज़ा ही मज़ा रहा! 🌟

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