जब आयरा खान, अगात्सु फाउंडेशन की संस्थापक‑सीईओ Agatsu Foundation ने 10 अक्टूबर, 2025 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एक सार्वजनिक चर्चा में अपनी कहानी खोलकर सुनाई, तो यह खबर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना अभी‑तक का सबसे बड़ा कदम बन गया। भारत में कई लोग अभी भी इस विषय को टैबू समझते हैं, लेकिन आयरा ने अपने दर्द को शब्दों में बदल कर सामाजिक धारणाओं को तोड़ने की कोशिश की।
पृष्ठभूमि और विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है, जिसका लक्ष्य मानसिक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्टिग्मा को खत्म करना है। इस दिन के पीछे की पहल 1992 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने की थी, और भारत में इसे हर वर्ष विभिन्न NGOs और सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रोमोट किया जाता है। इस वर्ष के थीम को "मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य की समान मान्यता" दिया गया था, जिससे यह बात और ज़ोर पकड़ी गई कि मन और शरीर दोनों की देखभाल आवश्यक है।
आयरा खान की व्यक्तिगत कहानी
आयरा ने कहा, “मैंने फरवरी 2025 में ‘Love Matters’ पॉडकास्ट के एक एपिसोड में बताया कि मुझे क्लिनिकल डिप्रेशन का निदान हुआ था। उस समय मेरा मन ऐसा था जैसे कहीं पर एक दरी में गिर गया हो—उहापोह, अकेलापन, और लगातार थकान।” वह आगे बताती हैं कि यह संघर्ष “बिना वजह नहीं होता, जैसे शारीरिक बीमारी का कारण बैक्टीरिया या वायरस होता है, वैसी ही मानसिक बीमारी के भी कारण होते हैं।”
वह अपनी शुरुआती डर की बात भी साझा करती हैं: “मैंने पहले अपनी भावनाओं को बोलने से डर लगती थी, क्योंकि मुझे समझ नहीं आती थी कि ये भावनाएँ क्यों आती हैं।” इस भावना को उन्होंने आगे "आत्म‑सुरक्षा" की एक रूपरेखा में बदल दिया, जहाँ वह लोगों को यह समझाने की कोशिश करती हैं कि “अगर आपके बच्चे को कट लग जाए, तो आप तुरंत बैंड‑एड लगा देते हैं; क्यों न हम अपने मन के ‘कट’ पर भी इसी तरह का ध्यान दें?”
आयरा का यह बयान कई दर्शकों को गहरा लग रहा है, खासकर उन युवा लोगों को जो अभी‑भी अपनी पहली डिप्रेशन एटैक का सामना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय और आँकड़े
डॉ. राधा कुमारी, एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक, ने कहा, “भारत में लगभग 15‑20% जनसंख्या किसी न किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, लेकिन केवल 10‑12% ही उन पर उपचार करवाते हैं।” उन्होंने यह भी उजागर किया कि “स्टिग्मा और जागरूकता की कमी ही मुख्य कारण हैं, जिसके चलते लोग मदद लेने में हिचकिचाते हैं।”
प्रभात खबर के अनुसार, पिछले साल भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर किए गए सर्वे में 68% उत्तरदाता ने बताया कि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य को ‘शारीरिक स्वास्थ्य’ से कम महत्त्व देते हैं। यही आंकड़े आयरा को इस दिशा में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
- 2025 में भारत में रिपोर्टेड डिप्रेशन केसों में 7% की वृद्धि दर्ज हुई।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि विश्व स्तर पर हर 4 लोगों में से 1 को जीवन में कम से कम एक बार मानसिक स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ता है।
- अगात्सु फाउंडेशन ने 2024‑25 में 12 शहरी कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यशालाएँ चलाने की योजना बनाई थी, जिसमें कुल 3,500 छात्रों ने हिस्सा लिया।
- एआर रहमान ने आयरा को व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करने के लिए एक छोटा संगीत सत्र दिया, जिससे वह “सुरक्षा की भावना” महसूस कर रही थीं।
आयरा ने भी उल्लेख किया कि “एआर रहमान से मिली प्रेरणा मेरे लिए एक मोड़ थी; उनकी संगीत की लहरों ने मेरे दिमाग को शांत किया और मुझे फिर से लिखने की हिम्मत दी।” जहाँ रहमान की भूमिका अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह संकेत मिलता है कि कला और संगीत उपचार भी मानसिक स्वास्थ्य में सहायक हो सकते हैं।
समाज पर संभावित प्रभाव
आयरा की आवाज़ अब सिर्फ एक सेलिब्रिटी की बात नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बन रही है। दक्षिण एशिया में जहाँ मानसिक बीमारी अक्सर “टैबू” मानी जाती है, ऐसे व्यक्तियों की खुली बातों से कई परिवारों को अपने भीतर के दबाव को पहचानने का अवसर मिलता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तरह के सार्वजनिक बयान प्रत्येक साल दो‑तीन बार होते रहें, तो अगले पाँच साल में स्टिग्मा में 30% तक गिरावट आ सकती है।
अगात्सु फाउंडेशन के आंकड़े दर्शाते हैं कि उनकी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर 2025 में 1.2 मिलियन अद्वितीय विज़िटर आए, जिसमें 45% युवा (18‑30 वर्ष) थे। यह दर्शाता है कि डिजिटल पहल भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रही है।
आगे की योजना और सहयोग
आगेआगे, आयरा ने कहा कि वह अपने फाउंडेशन के माध्यम से “मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक राष्ट्रीय‑स्तरीय आपातकालीन हेल्पलाइन” स्थापित करने की सोच रखती हैं, जिससे 24×7 काउंसलिंग उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट अभी सरकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर तौर‑तरीकों को अंतिम रूप दे रहा है।
इसके अलावा, आयरा ने संगीतकार एआर रहमान के साथ मिलकर एक “ध्वनि‑चिकित्सा” कार्यक्रम तैयार करने की योजना बनाई है, जिसमें संगीत थैरेपी सत्रों को स्कूलों और कॉलेजों में लागू किया जाएगा। यह पहल भारत की पहली बड़े पैमाने पर संगीत‑आधारित मानसिक स्वास्थ्य पहल बनने की संभावना रखती है।
अंत में, आयरा ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि हर भारतीय को यह लगे कि वह अकेला नहीं है, और मदद का हाथ हमेशा तैयार है।” यह शब्द न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत यात्रा का सार है, बल्कि भविष्य की कई पीढ़ियों के लिए आशा का दीपक भी बनेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आयरा खान का मानसिक स्वास्थ्य अभियान उन युवा लोगों को कैसे मदद करता है?
आयरा के फाउंडेशन ने ऑनलाइन वर्कशॉप, काउंसलिंग हॉटलाइन और स्कूल‑कॉलेज‑स्तर पर जागरूकता सत्र चालू किए हैं, जिनसे 2025 में 1.2 मिलियन युवा लाभान्वित हुए। यह सत्र विद्यार्थियों को अपने भावनात्मक लक्षणों को पहचानने और सही मदद लेने की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं।
एआर रहमान ने आयरा की मदद में कौन‑सी भूमिका निभाई?
रहमान ने आयरा को एक निजी संगीत सत्र देकर मानसिक शांति प्रदान की। इस अनुभव ने आयरा को यह एहसास दिलाया कि संगीत थैरेपी भी मानसिक उपचार का हिस्सा हो सकती है, और अब वे इस विचार को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रही हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का मुख्य उद्देश्य क्या है?
10 अक्टूबर को मनाया जाने वाला यह दिन जागरूकता बढ़ाने, स्टिग्मा घटाने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए नीति निर्माताओं को प्रेरित करने के लिए स्थापित किया गया था। भारत में इससे हर साल नई पहल और कार्यक्रम शुरू होते हैं।
डॉ. राधा कुमारी के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
डॉ. कुमारी के अनुसार, 15‑20% जनसंख्या मानसिक बीमारियों से प्रभावित है, परन्तु उपचार only 10‑12% के पास ही पहुंचता है। मुख्य बाधाएँ सामाजिक स्टिग्मा, जागरूकता की कमी और योग्य काउंसलर की अपर्याप्तता हैं।
आगामी महीनों में आयरा खान कौन‑सी नई पहलें लाने की योजना बना रही हैं?
वह 24‑घंटे काउंसलिंग हेल्पलाइन, राष्ट्रीय स्तर पर संगीत‑थैरेपी कार्यक्रम, और शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम का एकीकरण करने की तैयारी कर रही हैं, जो अगले वर्ष में लागू होने की संभावना है।
Hrishikesh Kesarkar
अक्तूबर 10, 2025 AT 22:04आयरा का खुला इथे मत बताना, अभी भी बहुत लोग पेन में छुपाते हैं।
Sreenivas P Kamath
अक्तूबर 20, 2025 AT 21:38वाह, आखिरकार सेलेब्रिटी ने सच्चाई बोली, अब सबको अपना प्यारा‑सा थैरेपी ऐप डाउनलोड करना पड़ेगा।
Chandan kumar
अक्तूबर 30, 2025 AT 20:13लगता है फिर से वही PR ट्रिक, तुम्हारी फाउंडेशन के इवेंट की रिपोर्ट तो हमेशा चमकदार रहती है।
Swapnil Kapoor
नवंबर 9, 2025 AT 19:47डॉ. राधा कुमारी ने बताया कि भारत में 15‑20% लोग मानसिक बीमारी से जूझ रहे हैं, पर सिर्फ 10‑12% को इलाज मिलता है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि हेल्पलाइन और स्कूल‑कॉलेज में नियमित काउंसलिंग सत्रों की जरूरत है। एआर रहमान की संगीत‑थैरेपी का प्रयोग एक वैकल्पिक उपचार के रूप में वैज्ञानिक रूप से समर्थन प्राप्त कर रहा है। एक व्यवस्थित डेटा संग्रह और फॉलो‑अप मैकेनिज्म के बिना प्रोग्राम की प्रभावशीलता को मापना मुश्किल होगा। इसलिए अगात्सु फाउंडेशन को क्लिनिकल ट्रायल डिज़ाइन करने पर विचार करना चाहिए।
kuldeep singh
नवंबर 19, 2025 AT 19:21यह सुन कर दिल खुशी से झूम रहा है कि एक बड़ी सिलेब्रीटी ने अंततः अपनी असली कहानी बताई, अब पूरे देश में हर गली में इस पर चर्चा होगी, और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में टाबू एकदम टूट जाएगा! 🎉
Shweta Tiwari
नवंबर 29, 2025 AT 18:56आदरनिय महोदया, आपके द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि 2025 में डिप्रेशन केस में 7% की वृद्धि ने सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता को उजागर किया है। निरंतर अनुसंधान एवं बहु‑विषयक सहयोग द्वारा ही इस चुनौती को पार किया जा सकता है।
Harman Vartej
दिसंबर 9, 2025 AT 18:30मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए, यही सच है।
Amar Rams
दिसंबर 19, 2025 AT 18:04आयरा खान की उद्घोषणा एक प्रो-एक्टिव पॉलिसी‑रेफ़ॉर्मेटिव मोमेंट को प्रतिपादित करती है, जहाँ सॉशियल कैपिटल और इंटेग्रेटेड हेल्थ सिस्टम्स का संगम आवश्यक प्रतीत होता है।
Rahul Sarker
दिसंबर 29, 2025 AT 17:39देश की शान है कि हमारी धरोहर में अब मानसिक स्वास्थ्य को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है, विदेशों को देखो, हम ही असली बेस्ट हैं! 🚩
Sridhar Ilango
जनवरी 8, 2026 AT 17:13विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयरा खान का खुलासा वास्तव में एक सामाजिक चेतना की ज्वाला है। उन्होंने अपने डिप्रेशन के अनुभव को शब्दों में पिरोते हुए बताया कि कैसे अंदर की अंधेरी गहराई कभी‑कभी शारीरिक बीमारी की तरह स्पष्ट नहीं रहती। इस सिलसिले में उन्होंने संगीत थैरेपी को एक संभावित उपचार के रूप में उल्लेख किया, जो वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हो रहा है। एआर रहमान की निजी सत्र में उसे मिली शांति ने उनके लेखन में नई ऊर्जा डाल दी, और इस बात को सार्वजनिक रूप से साझा करना एक साहसिक कदम है। भारत में अभी भी 15‑20% जनसंख्या मानसिक रोगों से संघर्ष करती है, पर मात्र 10‑12% को उचित देखभाल मिल पाती है, यह आँकड़ा वाकई चिंताजनक है। आयरा द्वारा स्थापित अगात्सु फाउंडेशन ने इस अंतर को पाटने के लिये कई शहरी कॉलेजों में कार्यशालाएँ चलायीं, जिससे 3,500 छात्रों ने लाभ उठाया। यह दर्शाता है कि युवा वर्ग में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी जागरूकता की कमी और स्टिग्मा की दीवारें उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए एक 24×7 हेल्पलाइन का विचार काफी समय से आवश्यक था, पर उसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया अभी भी सरकारी नीति के साथ तालमेल बिठा रही है। संगीत‑थैरेपी को स्कूली पाठ्यक्रम में एकीकृत करने की पहल आशावादी लगती है, पर इसके लिए प्रशिक्षित थेरापिस्टों की कमी एक गंभीर बाधा है। यह पहल सफल होने के लिये बहु‑आधारीय सहयोग, फंडिंग, और सतत मूल्यांकन जरूरी है। आयरा की व्यक्तिगत कहानी से प्रेरित होकर कई युवा अब अपने आंतरिक दर्द को पहचानने लगे हैं, जो कि एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है। इस बदलाव को स्थायी बनाने के लिये सामाजिक मीडिया, परम्परागत मीडिया, और शैक्षणिक संस्थानों को एकजुट होना चाहिए। अंत में, यह स्पष्ट है कि व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वजनिक मंच पर लाने से सामाजिक मान्यताओं को तोड़ने का अवसर मिलता है, और यह भारत के मानसिक स्वास्थ्य परिदृश्य को पुनः आकार देगा।