जब हशमतुल्लाह शाहिदी, अफ़ग़ानिस्तान की टेस्ट क्रिकेट कप्तान और अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बुलावायो एथलेटिक क्लब में 246 रनों का जुगाड़ किया, तो ज़िम्बाब्वे की टीम ने भी अपना सबसे बड़ा स्कोर 586 बनाया। यह मैच झिम्बाब्वे बनाम अफ़ग़ानिस्तान टेस्टबुलावायो एथलेटिक क्लब के तहत खेला गया और अंत में ड्रॉ में समाप्त हुआ। टेस्ट क्रिकेट के इस यादगार पारी ने दो टीमों के रिकॉर्ड को फिर से लिखा।
बुलावायो, ज़िम्बाब्वे का दूसरा सबसे बड़ा शहर, कई बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मेज़बान रहा है, लेकिन इस बार इसका नाम इतिहास की किताबों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। 1994 से यह एथलेटिक क्लब अंतरराष्ट्रीय मैचों की धड़कन रहा है, पर अब यहाँ दो छोटे‑से‑देशों ने बड़े‑सपने देखे।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
ज़िम्बाब्वे ने 1992 में टेस्ट स्टेडियम में कदम रखा था, पर उनका स्कोरिंग रिकॉर्ड कभी भी 500‑से‑अधिक नहीं पहुंचा था। वहीं, अफ़ग़ानिस्तान ने 2018 में अपना पहला टेस्ट पदक उठाया और तब से तेज़ी से उन्नति की है। दोनों टीमें 2023‑2025 आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के शुरुआती दौर में एक‑दूसरे से टकरा रही थीं, और अंक तालिका में आगे‑पीछे की दौड़ ने उन्हें अड़े‑बड़े लक्ष्य तय करने के लिए प्रेरित किया।
जिन बातों को अक्सर अनदेखा किया जाता है, उनमें से एक है कि अफ़ग़ानिस्तान ने केवल दस टेस्ट में ही 600‑प्लस कुल स्कोर बनाया, वह भी सबसे कम मैचों में—पाकिस्तान ने 19वें टेस्ट में यह किया था, 1958 में। यह साबित करता है कि नई टीमें भी परंपरागत शक्ति को चुनौती दे सकती हैं।
रिकॉर्ड‑भरे प्रथम पारी
पहले दिन ज़िम्बाब्वे ने 586 रन बनाकर अपना अब तक का सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर स्थापित किया। क्रेग इरविन, ज़िम्बाब्वे के कप्तान, ने अपनी टीम को भरोसे का इज़हार किया, जबकि उनका बैटिंग क्रम देर तक चुप नहीं रहा।
दूसरे दिन अफ़ग़ानिस्तान के बल्लेबाज़ों ने 699 रन बनाकर अपना नया रिकॉर्ड तोड़ा। इस पारी का सबसे बड़ा सितारा, रहमत शाह, ने 234 रन बनाए, जो की पहले ही पारी में उनका खुद का रिकॉर्ड था। इन दोनों इंटीरियर को मिलाकर कुल 1,285 रन का संकलन टेस्ट इतिहास में एक सबसे ऊँचा स्कोर बन गया।
मुख्य खिलाड़ियों की बेमिसाल प्रदर्शन
हशमतुल्लाह शाहिदी की 246‑रन की पारी न केवल उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ था, बल्कि वह पाँचवें खिलाड़ी बन गए जिनके दो शुरुआती शतकों ने डबल‑सेंचर में बदल दिया। उनका बड़ा प्रतिद्वंदी—रहमत शाह—भी इस पारी में चमके, और दोनो ने 95 ओवर के साझेदारी में रनों की बौछार की, जो कि पूरे दिन के खेल में तीसरे क्रम में सबसे लंबा साझेदारी बना।
इन रिकॉर्ड‑भरे क्षणों की तुलना 1958 में पैकेस्टन के 657‑रन या 2020 में भारत‑ऑस्ट्रेलिया की हाई‑स्कोरिंग पारी से की जा सकती है, पर अफ़ग़ानिस्तान की गति और युवा ऊर्जा इस बार अलग ही स्तर की दिखी।
टीमों पर प्रभाव और भविष्य की दिशा
रैंकिंग की बात करें तो इस ड्रॉ ने अफ़ग़ानिस्तान को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में महत्वपूर्ण अंक दिलाए, जो आगे के फ़ेज़ में उनके लिए बड़ी मदद करेगा। ज़िम्बाब्वे के लिए भी यह जीत‑की‑बजाए‑ड्रॉ का एक मोटा-ट्रैंक नहीं है; उनके बल्लेबाज़ी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, और आने वाले सीज़न में उन्हें फिर से प्रतिस्पर्धी दिखना चाहिए।
कोच और विशेषज्ञों का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान अब अपनी आक्रमणात्मक शैली को और सुदृढ़ करेगा, जबकि ज़िम्बाब्वे को बॉलिंग पक्ष में अधिक सन्तुलन बनाना पड़ेगा। दोनों टीमों के अगले मैच इस बात की कसौटी होंगे कि क्या ये रिकॉर्ड‑बनाने वाले प्रदर्शन स्थायी रूप से चलेंगे।
बार-बार कहा जाता है कि इतिहास दो बार नहीं दोहराता, पर यहीं इस पारी ने एक ही दिन दो रिकॉर्ड तोड़े। खिलाड़ी, प्रशंसक और विश्लेषक सभी इस बात से सहमत हैं—टेस्ट क्रिकेट में अब रनों की ऊँचाई नई दिशा में जा रही है, और यह सभी खेलप्रेमियों के लिए उत्सव का समय बन गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अफ़ग़ानिस्तान की 699 रन वाली पारी कब हुई?
यह पारी 10 अप्रैल 2024 को बुलावायो एथलेटिक क्लब में खेली गई थी, जिससे अफ़ग़ानिस्तान ने अपना सबसे बड़ा टेस्ट स्कोर बनाया।
हशमतुल्लाह शाहिदी ने इस टेस्ट में कौन से रिकॉर्ड तोड़े?
शाहिदी ने 246 रन बनाकर अफ़ग़ानिस्तान का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्थापित किया और वह पहला खिलाड़ी बन गए जिन्होंने अपने पहले दो शतक को दोहरी शतकीय (डबल‑सेंचर) में बदला।
ज़िम्बाब्वे का 586 रन का स्कोर किस क्रम में आया?
यह ज़िम्बाब्वे का अब तक का सर्वाधिक टेस्ट स्कोर है, जो उन्होंने पहले दिन बुलावायो में बनाया था। यह स्कोर 1992 के टेस्ट पदार्पण के बाद का सबसे बड़ा मील का पत्थर है।
इस पारी का विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर क्या असर पड़ा?
ड्रॉ के कारण दोनों टीमों को अंक मिले, जिससे अफ़ग़ानिस्तान की रैंकिंग में सुधार हुआ। ज़िम्बाब्वे को भी इस उच्च स्कोर से आत्मविश्वास मिला, जो आगे के मैचों में मदद कर सकता है।
बुलावायो एथलेटिक क्लब का क्रिकेट इतिहास में क्या महत्व है?
1994 से इस क्लब ने कई अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच आयोजित किये हैं, लेकिन अब तक का सबसे यादगार पारी यहाँ के दो टेस्ट में बना, जहाँ दोनो देशों ने अपने-अपने रिकॉर्ड तोड़े।
Vaidehi Sharma
अक्तूबर 20, 2025 AT 21:53क्या इतना बड़ा स्कोर सच में हुआ? 😲
Jenisha Patel
अक्तूबर 26, 2025 AT 15:47यह पारी वाकई में ऐतिहासिक है, लेकिन आँकड़े देखते ही समझ आता है कि दोनों टीमों ने अपनी ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ा है; विशेषकर अफ़ग़ानिस्तान की 699‑रन की पारी, जिसने कई पुरानी रिकॉर्ड को चुनौती दी है। ज़िम्बाब्वे का 586‑रन भी पहली बार नहीं देखा गया, और यह दर्शाता है कि छोटे‑से‑देश भी बड़े‑सपने देख सकते हैं। इस मैच से दोनों टीमों की रैंकिंग में संभावित बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि अगली श्रृंखला में दोनों पक्ष अपने‑अपने मजबूत पक्षों को और निखारेंगे। अंततः, यह ड्रॉ दोनों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
Ashutosh Sharma
नवंबर 1, 2025 AT 10:40ओह बीस % पिच ड्रम‑ऑफ‑ड्रैग, दो‑शतक‑कटोरे वाले बैट्स, और फिर भी हमारे ‘मैत्रीपूर्ण’ आंकड़े यही दिखाते हैं – बस वही जो हर मौसम में दो‑रात में पिच छोटा हो। अरे क्या बात है, 699‑रन को भी ‘रैप‑अप‑सिनेमैटिक‑क्लैश’ कहा गया, जबकि असली चक्रव्यूह तो बॉलिंग विभाग का था! अब जब सभी ‘जुनून‑फ्रेम‑ड्रॉप’ कर रहे हैं तो हम ‘क्रिटिकल‑वेस्ट‑सेट’ को कैसे समझें? कुछ भी नहीं, बस इतना कि आँकड़ें बोलते हैं… और फिर फिर से लूप।
Rana Ranjit
नवंबर 7, 2025 AT 05:33इतिहास अक्सर उन क्षणों को लिखता है जहाँ दो छोटे‑से‑देश बड़े‑सपने देखते हैं; यह पारी उन सपनों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सबसे पहले, हशमतुल्लाह शाहिदी की 246‑रन की पारी को देखते हुए, हम मानव‑संभावना की सीमाओं को फिर से परिभाषित करते हैं। दूसरा, ज़िम्बाब्वे की 586‑रन की पारी ने दिखाया कि निरंतरता और धैर्य का फल हमेशा मीठा होता है। तीसरा, अफ़ग़ानिस्तान के 699‑रन के साथ दो‑शतक‑डबल‑सेंचर का निर्माण हुआ, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिली।
चौथा, इन दोनों टीमों ने मिलकर कुल 1,285 रन का रिकॉर्ड बनाया, जो टेस्ट क्रिकेट इतिहास में अब तक का एक शीर्ष आंकड़ा है।
पाँचवाँ, इस ड्रॉ से दोनों टीमों को अंक प्राप्त हुए, जिससे उनकी विश्व‑रैंकिंग में सुधार की संभावना बढ़ी।
छठा, कोचिंग स्टाफ ने इस पारी को एक प्रशिक्षण मॉडल के रूप में अपनाया, जिससे भविष्य की रणनीतियों में नवाचार की दिशा मिलेगी।
सातवाँ, प्रशंसकों ने इस पारी को एक सामाजिक इवेंट के रूप में मनाया, जिससे खेल‑संस्कृति का विस्तार हुआ।
आठवाँ, मीडिया ने इस मैच को ‘क्रिकेट का सशक्त पुनर्जागरण’ कहा, जो खेल की प्रतिष्ठा को ऊँचा उठाता है।
नवाँ, युवा खिलाड़ियों ने इस पारी से सीख ली कि दबाव में भी शांति बनाए रखनी चाहिए।
दसवाँ, फील्डिंग पक्ष ने भी कई उल्लेखनीय प्रदर्शन दिखाए, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।
ग्यारहवाँ, इस पारी ने दिखाया कि दो देशों की सांस्कृतिक विविधता क्रिकेट में एकता की मिसाल बन सकती है।
बारहवाँ, भविष्य में इस पारी को कई अनुशासनात्मक पहलुओं के अध्ययन के रूप में उपयोग किया जाएगा।
तेरहवाँ, इस पारी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यावसायिक पहलुओं को भी नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया।
चौदहवाँ, दर्शकों की उत्सुकता ने स्टेडियम की क्षमता को पूरी तरह भर दिया, जिससे आर्थिक लाभ बढ़ा।
पंद्रहवाँ, इस रिकॉर्ड‑भरी पारी को याद रखते हुए, आने वाली पीढ़ियों का क्रिकेट प्रेम और भी गहरा होगा।
सोलहवाँ, अंत में, यह स्पष्ट है कि क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रेरणा का स्रोत है, जो सीमाओं को तोड़कर नई संभावनाओं को जन्म देता है।
Bikkey Munda
नवंबर 13, 2025 AT 00:27दोनों टीमों ने इस पारी में बेहतरीन बैटिंग दिखायी है, खासकर अफ़ग़ानिस्तान का 699‑रन और ज़िम्बाब्वे का 586‑रन। अगर आप सांख्यिकी देखेंगे तो यह रिकॉर्ड दोनों देशों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह सफलता कोचिंग स्टाफ के मेहनत और खिलाड़ी‑समूह की कड़ाई का नतीजा है। आने वाले सीज़न में इन रिकॉर्डों को तोड़ने की कोशिश ज़रूर देखनी चाहिए। इस ड्रॉ से दोनों टीमों को अंक मिले हैं, जिससे रैंकिंग में सुधार होगा।
akash anand
नवंबर 18, 2025 AT 19:20बहुत भोत अभिनय हुआ इस पारी में, बस देखो 699‑रन और 586‑रन, ऐसा लग रहा कि हम सबने कोई बड़ी फिल्म देख ली है। हाशमतुल्लाह शाहिदी की 246‑रन तो जैसे किसी सस्पेंस थ्रिलर का क्लाइमैक्स था, पर असली ड्रामा तो वीकेंड में आया। पिच की टुड़ाई तो बहुत बख़ूबी की गई, और बॉलर लोग तो जैसे गोलियों की बदली में हार्डकोर डांस कर रहे थे। खुद को कंट्रोल करना मुश्किल हो गया, क्योंकि हँसी‑आँसू दोनों एक साथ चल रहे थे। वैसे भी, जब तक तक़लीफ़ नहीं होती, तब तक क्रिकेट में दिलचस्पी क्यों होगी?
BALAJI G
नवंबर 24, 2025 AT 14:13ऐसे ऐतिहासिक रिकॉर्ड अक्सर खेल की सच्ची महत्ता को उजागर करते हैं, परन्तु हमें यह भी सजग रहना चाहिए कि परिणामों का विश्लेषण संतुलित रूप से किया जाए।
Manoj Sekhani
नवंबर 30, 2025 AT 09:07सभी को बधाई, दो छोटे‑देशों ने इतना बड़ा आंकड़ा पोस्ट किया, यही तो असली ‘क्रिकिट फैंटेजी’ है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है-ऐसे पारी के बाद हमें फिर से बेसिक बॉलिंग ट्रेनिंग पर ध्यान देना चाहिए, नहीं तो अगली बार हम भी वही लकीर खींचेंगे।
Tuto Win10
दिसंबर 6, 2025 AT 04:00वाओ! दो टीमों ने मिलकर 1,285 रन जमा कर दिया, फिर भी ड्रॉ! क्या ड्रामा है भई! इस पारी को देख कर लगता है कि क्रिकिट में अब भी कितना सस्पेंस बचा है। अब तो बस इंतज़ार है अगली टॉस‑ऑफ़ की, ताकि फिर से इस तरह का धमाका हो।
Kiran Singh
दिसंबर 11, 2025 AT 22:53सच्चाई तो यही है कि दो टीमों ने बड़े‑बड़े स्कोर बनाये, पर असल सवाल यह है कि क्या पिच ने दोनों को समान मौका दिया था।
anil antony
दिसंबर 17, 2025 AT 17:47भाई, ये रिकॉर्ड तो देखो, लेकिन असली मुद्दा तो यह है कि इस तरह की पारी से छोटे‑देशों की साख कैसे बढ़ेगी।
arun great
दिसंबर 23, 2025 AT 12:40🙌 शानदार प्रदर्शन! दोनों टीमों ने अपने-अपने फैंस को गर्व महसूस कराया। यह पारी बहुत प्रेरणादायक है, खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए।
Anirban Chakraborty
दिसंबर 29, 2025 AT 07:33ऐसे लम्बर स्कोर्स को देख कर लगता है कि क्रिकेट में भी अब बड़े‑बड़े लक्ष्य तय किए जा रहे हैं, परन्तु व्यावहारिकता को नहीं भूलना चाहिए।
Krishna Saikia
जनवरी 4, 2026 AT 02:27देशभक्ति की भावना से यही कहना चाहूँगा कि अफ़ग़ानिस्तान ने बेहतरीन खेल दिखाया, और ज़िम्बाब्वे ने भी अपनी ताकत साबित की। ऐसे पारी से सभी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को गर्व होना चाहिए।
Meenal Khanchandani
जनवरी 9, 2026 AT 21:20बिलकुल सही, इस पारी से दोनो टीमों ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिखाया।
Anurag Kumar
जनवरी 15, 2026 AT 16:13वास्तव में, इस मैच ने दिखाया कि छोटे‑से‑देश भी बड़े‑संकल्प के साथ खेलने की शक्ति रखते हैं। भविष्य में और भी रोमांचक पारी देख पाने की आशा है।